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फांसी देने वक्त जल्लाद कैदी के कान में क्या कहता है ?

जब कोर्ट रूम मे जज किसी को मौत की सजा सुनाता है। तब वो जिस कलम से यह सजा लिखता है वह उस कलम की नी तोड़ देता है।

फासी का नाम सुनकर अपराधी थर थर कांपने लगता है। वैसे तो फासी देने के कई नियम है जैसे की फासी का फंदा। वो जगह जहा फासी दी जानी है और उसका समय पहेले की ही फिक्स होता है।

जिस दिन अपराधी को फासी की सजा दी जाती है। jail का अधीक्षक, डॉक्टर और जल्लाद मौजूद रहेते है। इन सभी के बगैर अपराधी को फासी नहीं दी जा सकती।

जिस अपराधी को फासी दी जाती है। उसके पास आखरी समय तक जल्लाद मौजूद रहता है।

हर जल्लाद को फासी देने से पहेले अपराधी के कान मे कुछ कहना होता है।

यह बात काफी कम लोगों को पता होती है की फासी के पहेले जल्लाद कैदी के कान मे क्या कहता है। जिसके बाद मुजरिम को लटका देने के अलावा जल्लाद के पास कोई और चारा नहीं रहता।

क्या जल्लाद मुजरिम को फासी की सजा देने के बाद चैन की नींद सोता होगा? यह एक सोचने वाली बात है।

फासी से जुड़ी एक और बात है की फासी हमेशा सुबह दी जाती है सूर्योदय या फीर उसी समय के आस पास।

फासी का समय सुबह सुबह का इसलिए रखा जाता है की jail मैनुअल के तहेट Jail के सारे काम सुबह सुबह ही होते है।

आप और हम जैसे लोग नॉर्मल exam देने जाते है, रिजल्ट्स पता करने जाते है, जॉब इंटरव्यू देने जाते है इतने मे ही हमारा Heart रेट बढ़ जाता है। हम खुदके दिल की धड़कन सुन सकते है। घबराहट छुपाये भी नहीं छुपा सकते तो सोचिए उस अपराधी को कैसा महसूस होता होगा जब उसे फासी के तख्त पर चढ़ाया जाता होगा, काला कपड़ा उसके चहरे पर चढ़ाया जाता होगा।

और फीर वो डरावने शब्द जो जल्लाद उस मुजरिम के कान मे कहता है। न ही जल्लाद के शब्दों म नफरत होती है और न ही गुस्सा। शायद इसलिए क्युकी अपराधी की आत्मा शांत हो जाए उसकी रूह सुकून से शरीर छोड़ सके । शायद इसलिए क्युकी जल्लाद के अंतर मन मे किसी की जन लेने का अपराध बोध न हो।

ड्यूटी पूरी करके जब जल्लाद अपने घर जाए खाना खाके जब सोने के लिए आखे बंध करे तो उसके सामने फासी की सूली प लड़का हुआ तड़पता हुआ मुजरिम नजर न आए शायद इसलिए जल्लाद उसके कान मे कुछ कहता है।

फासी के कुछ समय पहले जल्लाद अपराधी के कान मे माफी माँगता है और कहता है।

मुजे माफ करदों मे मजबूर हु, मुजे माफ करदों मे सरकार का गुलाम हु,आप के लिए बस कुछ नहीं कर सकता हु ।

अगर जल्लाद हिन्दू होता है तो राम राम बोलत है। वही अगर मुस्लिम हो तो वह सलाम बोलता है।

यह शब्द बोलने के तुरंत बाद ही अपराधी कापने लगता है और फासी का लिवर दबा दिया जाता है।

यह बात सच है की जिंदगी बहुत सिम्पल है लेकिन हम उसे complicated बना देते है। लेकिन यह बात भी माननी जरूरी है की जिंदगी कुछ लोगों के सामने एसी मुश्किल छीजे खड़ी कर देती ह जिससे उन्हे अपराध करने मे मजा आने लगता है या फीर उन्हे अपराध करने के लिए मजरूब कर दिया जाता है।

कुछ को सजा मिल जाती है लेकिन भ्रस्टाचार से कुछ लोग सीधे सीधे निकल जाते है।

इस दुनिया मे जी रहा हर एक आदमी criminal है कुछ ने बड़े अपराध किए है तो कुछ ने छोटे। आपके क्राइम की सजा आपको मिले या न मिले लेकिन एक बात जरूर याद रखिए की आपके अंतर मन मे सब register हो रहा है।

आखिर कर हमे वो ही मिलता है जिसके हम हकदार होते है।

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